Jharkhand Mid Day Meal Scam: उधार राशन पर चल रही सरकारी स्कूलों की रसोई, अब दुकानदारों ने भी कर दिया इनकार

झारखंड के पलामू जिले में मध्याह्न भोजन योजना की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि दुकानदार अब उधार पर राशन देने से भी मना कर रहे हैं। जी हां, यह सुनकर हैरानी होगी लेकिन सच यही है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को खाना बनाने के लिए महीनों से उधार राशन पर काम चल रहा था। अब जब दुकानदारों का लाखों रुपए का बकाया पेमेंट नहीं मिला तो उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। इस वजह से कई स्कूलों में बच्चों को खाना मिलना बंद होने की कगार पर है। इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि आखिर यह स्थिति कैसे पैदा हुई और सरकारी पैसा कहां अटका हुआ है।

महीनों से नहीं मिला है राशन का पैसा

पलामू जिले में मध्याह्न भोजन योजना के तहत राशन सप्लाई करने वाले दुकानदारों का कहना है कि उन्हें पिछले 6 से 8 महीने का पेमेंट नहीं मिला है। कुछ दुकानदारों पर तो ₹5 लाख से ₹10 लाख तक का बकाया है। शुरुआत में दुकानदारों ने सोचा कि थोड़ी देरी है, पेमेंट आ जाएगा, लेकिन अब इतने महीने बीत जाने के बाद उनका धैर्य खत्म हो गया है। बिना पैसे के कोई भी दुकानदार कब तक अपनी जेब से माल दे सकता है? इसी वजह से अब ज्यादातर दुकानदारों ने साफ कह दिया है कि जब तक पुराना बकाया नहीं मिलेगा, वे एक दाना भी उधार नहीं देंगे।

स्कूलों में खाना बनाना हुआ मुश्किल

जब दुकानदार राशन देना बंद कर देंगे तो स्कूलों में बच्चों को खाना कैसे मिलेगा? यह सवाल अब सबसे बड़ा बन गया है। पलामू के कई स्कूलों में पहले से ही राशन की किल्लत चल रही है। कुछ स्कूलों में तो हेडमास्टर और शिक्षक खुद के पैसे लगाकर थोड़ा-बहुत राशन खरीद रहे हैं ताकि बच्चों को भूखा न रहना पड़े। लेकिन यह तरीका कब तक चलेगा? शिक्षकों की सैलरी भी समय पर नहीं आती और ऊपर से यह बोझ अलग। मध्याह्न भोजन योजना देश की सबसे बड़ी पोषण योजनाओं में से एक है, लेकिन झारखंड के इस जिले में इसकी हालत देखकर कोई भी दुखी हो सकता है।

सरकार क्यों नहीं दे रही है पैसा

स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि बजट में पैसे की कमी है और राज्य सरकार से फंड रिलीज नहीं हुआ है। लेकिन दुकानदारों और शिक्षकों का कहना है कि यह बहाना हर साल सुनने को मिलता है। योजना का पैसा केंद्र सरकार से आता है, फिर राज्य सरकार के पास जाता है और वहां से जिला स्तर पर पहुंचता है। इस पूरी प्रक्रिया में कहीं न कहीं पैसा अटक जाता है और आखिर में नुकसान गरीब बच्चों को उठाना पड़ता है जिन्हें स्कूल का खाना ही एक समय का पूरा भोजन होता है।

Disclaimer: यह आर्टिकल केवल जानकारी देने के उद्देश्य से लिखा गया है। स्थिति में बदलाव हो सकता है। किसी भी सरकारी योजना की सही जानकारी के लिए आधिकारिक सूत्रों से संपर्क करें।

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