अगर आप गांव में रहते हैं या आपके परिवार में कोई मनरेगा के तहत काम करता है तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। सरकार ने MGNREGA योजना का नाम बदलने का फैसला कर लिया है और साथ ही इसमें कुछ बड़े बदलाव भी किए जा रहे हैं। इस योजना का नया नाम होगा विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण), जिसे छोटे नाम से VB-G RAM G कहा जाएगा। यह बदलाव सिर्फ नाम का नहीं है, बल्कि इस योजना में कई नई सुविधाएं भी जोड़ी जा रही हैं जो गरीब परिवारों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकती हैं।
अब मिलेंगे 100 की जगह 125 दिन का काम
पहले इस योजना के तहत हर गरीब परिवार को साल में सिर्फ 100 दिन का गारंटीशुदा रोजगार मिलता था। लेकिन नए बदलाव के अनुसार अब हर ग्रामीण परिवार को 125 दिन का रोजगार मिलेगा, जो कि पहले से 25 दिन ज्यादा है। इसका मतलब है कि अब गांव के गरीब लोगों को पहले से ज्यादा समय तक काम मिलेगा और उनकी कमाई भी बढ़ेगी। हालांकि असली हकीकत यह है कि अभी तक सरकार 100 दिन का भी पूरा काम नहीं दे पा रही थी, औसतन लोगों को सिर्फ 50 दिन के आसपास ही काम मिल पाता था। अब सवाल यह है कि क्या सरकार नए नियम के तहत 125 दिन का काम दे पाएगी या नहीं, यह तो समय बताएगा।
खर्चे का तरीका बदलेगा – राज्यों को देना होगा हिस्सा
अभी तक मनरेगा में मजदूरों की पूरी मजदूरी केंद्र सरकार देती थी। लेकिन नई योजना में यह व्यवस्था बदल जाएगी। अब केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर खर्चा उठाना होगा, जिसमें 60 प्रतिशत केंद्र देगा और 40 प्रतिशत राज्य सरकार देगी। इसका सीधा मतलब यह है कि अब राज्य सरकारों की भी जिम्मेदारी बढ़ेगी। पहाड़ी इलाकों और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए यह बंटवारा 90:10 रहेगा, यानी केंद्र 90 प्रतिशत और राज्य 10 प्रतिशत खर्च करेंगे। यह बदलाव कुछ लोगों को चिंता में डाल रहा है क्योंकि अगर राज्यों के पास पैसा नहीं होगा तो मजदूरों को समय पर मजदूरी नहीं मिल सकती।
खेती के मौसम में रुक सकता है काम
नई योजना में एक और बड़ा बदलाव यह है कि राज्य सरकारें चाहें तो खेती के पीक सीजन में 60 दिन तक इस योजना को रोक सकती हैं। इसके पीछे सरकार की सोच यह है कि जब खेतों में बुवाई या कटाई का समय हो तो लोग अपने खेतों में काम करें और मनरेगा पर निर्भर न रहें। लेकिन कई मजदूर संगठनों का कहना है कि यह बदलाव उन लोगों के लिए परेशानी का सबब बन सकता है जिनके पास अपनी जमीन नहीं है और वे सिर्फ मजदूरी पर निर्भर हैं।
मनरेगा में अब तक क्या हुआ?
MGNREGA योजना को 2005 में शुरू किया गया था और यह दुनिया की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार योजना बन गई। इसका मकसद गांव के गरीब परिवारों को कम से कम 100 दिन का रोजगार देना था ताकि वे शहरों की तरफ पलायन न करें। पहले इसका नाम सिर्फ NREGA था, लेकिन 2009 में इसमें महात्मा गांधी का नाम जोड़ दिया गया। अभी तक इस योजना के तहत लगभग 8.6 करोड़ परिवार काम पा चुके हैं और सड़कों, तालाबों, कुओं जैसी बुनियादी चीजें बनाने में मदद मिली है।
असली हकीकत और चुनौतियां
हालांकि सरकार ने बड़े-बड़े दावे किए हैं, लेकिन असली हकीकत कुछ अलग है। बहुत से राज्यों में मजदूरों की मजदूरी महीनों तक रुकी रहती है। पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में तो 2022 से ही फंड रोक दिया गया है और 3000 करोड़ रुपए से ज्यादा की बकाया राशि अटकी हुई है। साथ ही जिन लोगों को 100 दिन का काम मिलना चाहिए था, उन्हें औसतन सिर्फ 50 दिन ही काम मिल पाता है। अब सवाल यह है कि जब 100 दिन का काम ही नहीं मिल पा रहा था तो 125 दिन का वादा कैसे पूरा होगा?
क्या होगा आम मजदूरों का?
नई योजना में कुछ अच्छी बातें हैं जैसे कि ज्यादा दिन का काम, हर हफ्ते मजदूरी मिलना और डिजिटल तरीके से काम का हिसाब रखना। लेकिन साथ ही कुछ चिंताएं भी हैं जैसे कि राज्यों पर खर्चे का बोझ बढ़ना और काम रुकने का डर। असल में यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि नया नाम और नए नियम गरीब मजदूरों के लिए फायदेमंद साबित होंगे या नहीं।
Disclaimer: यह जानकारी मौजूदा समाचारों के आधार पर दी गई है। सरकारी नियमों में बदलाव हो सकता है। किसी भी योजना से जुड़ने से पहले अपने नजदीकी पंचायत या सरकारी दफ्तर से पूरी जानकारी जरूर लें।