SBI Annuity Deposit Scheme: अगर आप रिटायर हो चुके हैं या फिर नियमित मासिक आय चाहते हैं तो एसबीआई की वार्षिकी जमा योजना आपके लिए बहुत अच्छा विकल्प है। इस योजना में आप एकमुश्त राशि जमा करते हैं और बदले में हर महीने एक निश्चित रकम पाते हैं जिसमें मूलधन और ब्याज दोनों शामिल होते हैं। यह योजना सुरक्षित और भरोसेमंद है क्योंकि यह भारत के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई द्वारा चलाई जाती है। ब्याज दर सावधि जमा के बराबर मिलती है और वरिष्ठ नागरिकों को अतिरिक्त ब्याज का लाभ भी मिलता है। इस योजना में 3 साल से लेकर 10 साल तक की अवधि चुन सकते हैं।
कितना मिलेगा हर महीने
अगर आप 5 साल के लिए ₹10 लाख जमा करते हैं तो सामान्य नागरिकों को लगभग ₹19,600 हर महीने मिलेंगे जबकि वरिष्ठ नागरिकों को ₹19,800 प्रति माह मिल सकते हैं। यह राशि मूलधन और ब्याज दोनों से मिलकर बनती है। जैसे-जैसे समय बीतता है, मूलधन घटता जाता है और ब्याज का हिस्सा भी कम होता जाता है लेकिन आपको मिलने वाली मासिक किस्त एक समान रहती है। अवधि पूरी होने पर पूरा मूलधन वापस हो चुका होता है इसलिए परिपक्वता पर कोई राशि नहीं मिलती। यह योजना उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो नियमित आय चाहते हैं और जिन्हें बड़ी रकम की जरूरत नहीं है।
ब्याज दरें कितनी हैं
एसबीआई वार्षिकी जमा योजना की ब्याज दर सावधि जमा के बराबर होती है और अवधि के अनुसार बदलती रहती है। जून 2025 से लागू दरों के अनुसार 3 साल के लिए 6.50 प्रतिशत सालाना, 5 साल के लिए 6.50 प्रतिशत, 7 साल के लिए 6.75 प्रतिशत और 10 साल के लिए 7.00 प्रतिशत वार्षिक ब्याज मिल रहा है। वरिष्ठ नागरिकों को इन दरों से 0.50 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज मिलता है यानी उनके लिए दरें 7.00 से 7.50 प्रतिशत तक हो सकती हैं। ध्यान रखें कि ब्याज दरें बैंक द्वारा समय-समय पर बदली जाती हैं इसलिए खाता खोलने से पहले ताजा दरें जरूर देख लें। ब्याज तिमाही आधार पर चक्रवृद्धि होता है और फिर मासिक मूल्य के रूप में दिया जाता है।
न्यूनतम और अधिकतम राशि
इस योजना में न्यूनतम जमा राशि इस बात पर निर्भर करती है कि आप कितने समय के लिए निवेश कर रहे हैं। मासिक किस्त कम से कम ₹1,000 होनी चाहिए इसलिए 3 साल के लिए न्यूनतम जमा ₹36,000 होगा, 5 साल के लिए ₹60,000 और 10 साल के लिए ₹1,20,000 होगा। अच्छी बात यह है कि अधिकतम जमा राशि की कोई सीमा नहीं है यानी आप जितना चाहें उतना जमा कर सकते हैं। यह सुविधा उन लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है जिनके पास बड़ी रकम है और वे नियमित आय चाहते हैं। जमा की गई राशि के अनुसार ही आपकी मासिक किस्त तय होती है।
कौन खोल सकता है खाता
भारत में रहने वाले सभी नागरिक इस योजना में खाता खोल सकते हैं। नाबालिग भी अपने अभिभावक के माध्यम से खाता खोल सकते हैं। आप अकेले या संयुक्त रूप से खाता खोल सकते हैं यानी पति-पत्नी मिलकर भी एक खाता खोल सकते हैं। लेकिन अनिवासी भारतीय यानी एनआरई और एनआरओ श्रेणी के ग्राहक इस योजना में खाता नहीं खोल सकते। खाता देश भर की किसी भी एसबीआई शाखा में खोला जा सकता है और बाद में दूसरी शाखा में भी स्थानांतरित किया जा सकता है। नामांकन की सुविधा भी उपलब्ध है लेकिन केवल व्यक्तियों के पक्ष में ही दी जा सकती है।
किस्त कब और कैसे मिलेगी
जमा करने के महीने के बाद अगले महीने की उसी तारीख को पहली किस्त मिलती है। उदाहरण के लिए अगर आपने 15 जनवरी को जमा किया तो पहली किस्त 15 फरवरी को आएगी। अगर वह तारीख महीने में नहीं है जैसे 31 तारीख तो अगले महीने की पहली तारीख को किस्त मिलेगी। किस्त सीधे आपके बचत खाते में जमा हो जाती है इसलिए बैंक जाने की जरूरत नहीं होती। खाता खोलते समय आपको एक सार्वभौमिक पासबुक दी जाएगी जिसमें सभी लेन-देन दर्ज होंगे। यह पासबुक आपके सावधि जमा के साथ भी काम करेगी।
समय से पहले निकासी के नियम
आम तौर पर इस योजना में समय से पहले पैसा निकालने की अनुमति नहीं है। लेकिन ₹15 लाख तक की जमा राशि के लिए समयपूर्व निकासी की जा सकती है हालांकि इसपर जुर्माना लगता है जो सावधि जमा के बराबर होता है। जमाकर्ता की मृत्यु की स्थिति में बिना किसी सीमा के पूरी राशि का समयपूर्व भुगतान किया जाता है और कोई जुर्माना नहीं लगता। इस स्थिति में पूरा बकाया मूलधन एक साथ परिवार को दे दिया जाता है। विशेष मामलों में बैंक वार्षिकी की शेष राशि के 75 प्रतिशत तक का कर्ज या ओवरड्राफ्ट भी दे सकता है। कर्ज मिलने के बाद वार्षिकी की किस्त सीधे कर्ज खाते में जमा होती है।
एफडी और आरडी से कैसे अलग है
सावधि जमा में आप एकमुश्त राशि जमा करते हैं और परिपक्वता पर मूलधन और ब्याज एक साथ मिलता है या फिर नियमित ब्याज भुगतान का विकल्प चुन सकते हैं। आवर्ती जमा में हर महीने एक निश्चित रकम जमा करनी होती है और परिपक्वता पर पूरी राशि मिलती है। लेकिन वार्षिकी जमा में आप शुरुआत में ही पूरी राशि जमा करते हैं और फिर हर महीने किस्त के रूप में मूलधन और ब्याज दोनों वापस पाते रहते हैं। अवधि पूरी होते-होते पूरा पैसा वापस हो चुका होता है। यह योजना उन लोगों के लिए है जिन्हें नियमित मासिक आय की जरूरत है न कि बड़ी रकम इकट्ठा करने की।
कर के नियम जान लें
इस योजना से मिलने वाली आय पर कर कटौती लागू होती है। अगर एक वित्तीय वर्ष में ब्याज आय ₹50,000 से अधिक है तो स्रोत पर कर कटौती यानी टीडीएस लगेगा। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा ₹1 लाख है। आधार कार्ड की धारा 80टीटीबी के तहत वरिष्ठ नागरिक ₹50,000 तक की ब्याज आय पर कटौती का दावा कर सकते हैं। अगर आपकी आय कर योग्य सीमा से कम है तो फॉर्म 15जी या 15एच जमा करके टीडीएस कटौती से बच सकते हैं। जमा की गई राशि पर धारा 80सी के तहत कर लाभ नहीं मिलता यह सुविधा केवल 5 साल की सावधि जमा में उपलब्ध है।
ऐसे खोलें खाता
किसी भी एसबीआई शाखा में जाकर वार्षिकी जमा योजना का फॉर्म मांगें। फॉर्म भरते समय अपनी व्यक्तिगत जानकारी, जमा राशि और अवधि सही-सही भरें। आधार कार्ड, पैन कार्ड, पते का प्रमाण और पासपोर्ट साइज फोटो साथ ले जाएं। अगर आपका एसबीआई में बचत खाता है तो उसी खाते से डेबिट करके वार्षिकी खाता खोल सकते हैं। इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से भी यह सुविधा ली जा सकती है बशर्ते आपका खाता सक्रिय हो और लेनदेन के लिए सक्षम हो। खाता खोलने के बाद आपको एक पासबुक और खाता संख्या मिलेगी जिससे आप अपनी किस्तों को ट्रैक कर सकते हैं।
Disclaimer: यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य से है। एसबीआई वार्षिकी जमा योजना की ब्याज दरें समय-समय पर बदलती रहती हैं। ऊपर बताई गई दरें जून 2025 से लागू हैं और बिना सूचना के बदल सकती हैं। खाता खोलने से पहले नजदीकी एसबीआई शाखा से वर्तमान ब्याज दरें और शर्तें जरूर पुष्टि कर लें। मासिक किस्त की गणना जमा राशि, अवधि और ब्याज दर पर निर्भर करती है। सटीक राशि जानने के लिए एसबीआई की वेबसाइट पर वार्षिकी कैलकुलेटर का उपयोग करें।